Old Rangji Temple in PushkarPhoto by Yashvardhan Parashar
400 से अधिक पावन देवालय

पुष्कर के पावन मंदिर

तीर्थ गुरु पुष्कर की पावन धरा पर 400 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर स्थित हैं — जहाँ विश्व प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर के वैभव से लेकर संकरी गलियों के भीतर छुपे वे प्राचीन शिवालय शामिल हैं जो पिछले एक हज़ार साल से अनवरत रूप से जन-आस्था और श्रद्धा प्राप्त कर रहे हैं।

पुष्कर के मंदिर

पवित्र स्थल और मंदिर

पुष्कर के समृद्ध आध्यात्मिक परिदृश्य को जानें, जहाँ प्राचीन वन देवालयों से लेकर ऊँची पहाड़ियों पर बने शिखर मंदिर मौजूद हैं।

विश्व का एकमात्र प्रमुखBrahma TemplePhoto by Alexander Schimmeck
14वीं शताब्दी — अवश्य दर्शन करें

जगतपिता ब्रह्मा मंदिर

संपूर्ण भूलोक पर भगवान ब्रह्मा को समर्पित एकमात्र जाग्रत प्रधान महातीर्थ। इसकी दिव्यता शब्दों से परे है। लाल गगनचुंबी शिखर, सफ़ेद संगमरमर का फर्श और हज़ारों साल प्राचीन यह धाम पूरे पुष्कर का मुख्य आध्यात्मिक केंद्र है।

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पहाड़ी की चोटी परSavitri TemplePhoto by Yashvardhan Parashar
पहाड़ी शिखर — संपूर्ण नगर का सर्वश्रेष्ठ दृश्य

सावित्री माता मंदिर

रत्नागिरी पहाड़ी के सर्वोच्च शिखर पर शान से खड़ा धाम, जो ब्रह्मा जी की ज्येष्ठ पत्नी देवी सावित्री को समर्पित है। यहाँ के व्यू-प्लेटफ़ॉर्म से दिखने वाला पूरी घाटी का नज़ारा पूरे पुष्कर में सबसे सर्वश्रेष्ठ है।

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पावन शक्तिपीठChamunda Mata Temple
पावन शक्तिपीठ — पहाड़ी की तलहटी में स्थित धाम

चामुंडा माता मंदिर (मणीबंध शक्तिपीठ)

शास्त्रों में वर्णित माँ भगवती के पूरे भारत में स्थित 51 जाग्रत शक्तिपीठों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण धाम। ऐसी मान्यता है कि यहाँ सती माता की कलाइयाँ (मणीबंध) गिरी थीं। गायत्री पहाड़ी की शांत तलहटी में स्थित इस मंदिर में माँ चामुंडा की अत्यंत जाग्रत और प्राचीन प्रतिमा विराजमान है, जहाँ शारदीय और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में देश भर से हज़ारों तांत्रिक और साधक जुटते हैं।

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अति प्राचीनVarah TemplePhoto by Varun Shiv Kapur
अति प्राचीन — सीधे सरोवर मुखी मंदिर

ऐतिहासिक वराह मंदिर

पुष्कर नगर का सबसे प्राचीन और विशालकाय मंदिर, जो भगवान विष्णु के 'वराह' (जंगली सूअर) अवतार को समर्पित है। सीधे सरोवर के सम्मुख स्थित इस मंदिर की प्राचीन नक्काशीदार पत्थर की सीढ़ियाँ सीधे वराह घाट के पवित्र जल तक जाती हैं।

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शैव संप्रदायAtmateshwar Mahadev TemplePhoto by Yashvardhan Parashar
12वीं शताब्दी — ऐतिहासिक भूमिगत शिव मंदिर

प्राचीन अटमटेश्वर महादेव मंदिर

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पुष्कर के महायज्ञ में अनजाने में हुए अपमान के बाद भगवान भोलेनाथ के क्रोध को शांत करने और उनसे क्षमा याचना के लिए स्वयं भगवान ब्रह्मा ने इस मंदिर की स्थापना की थी। वर्तमान जमीनी स्तर से कई फीट नीचे स्थित इस अनूठे भूमिगत गर्भगृह में सफेद संगमरमर से निर्मित एक अत्यंत जाग्रत 'पंचमुखी शिवलिंग' विराजमान है — जिसके पाँच मुख (सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष, ईशान) प्रकृति के पाँच तत्वों और चारों दिशाओं के प्रतीक हैं। औरंगजेब के काल में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने के बाद मराठों द्वारा पुनर्निर्मित यह मंदिर आज भी अगाध आस्था का केंद्र है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ शुद्ध दूध और शहद से अभिषेक करने से अविवाहित कन्याओं को सुयोग्य और उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

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वैष्णव संप्रदायOld Rangji TemplePhoto by Yashvardhan Parashar
1823 ई. — द्रविड़ स्थापत्य एवं राजपूत कला का संलयन

पुराना श्री रंगनाथ वेणुगोपाल मंदिर

वर्ष 1823 में हैदराबाद के धनी व्यापारी सेठ पूरन मल गनेरीवाल द्वारा निर्मित यह मंदिर राजस्थान में दक्षिण भारतीय रामानुज वैष्णव संप्रदाय का सबसे पहला और ऐतिहासिक गढ़ था। इसका गगनचुंबी द्रविड़ शैली का 'गोपुरम' प्रवेश द्वार राजस्थानी क्षितिज के बीच दक्षिण भारत के वैभव की याद दिलाता है। मंदिर के भीतर का स्थापत्य दक्षिण भारतीय शैली, राजपूत अलंकरण और बारीकी से उकेरे गए शेखावाटी भित्तिचित्रों (फ्रेस्को) का एक अद्भुत संलयन है, जो कृष्ण लीला और रामायण के प्रसंगों को दर्शाते हैं। इसके मुख्य ऊँचे चबूतरे पर 5 भव्य गर्भगृह बने हैं — जो भगवान रंगनाथ (वेंकटेश्वर), भगवान श्री कृष्ण, श्री रामानुजाचार्य, देवी लक्ष्मी और आंडाल (देवी गोदाम्माजी) को समर्पित हैं।

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गगनचुंबी गोपुरमNew Rangji TemplePhoto by Damini
1922 ई. — गगनचुंबी द्रविड़ गोपुरम शैली

नया रंगजी मंदिर (श्री बैकुंठनाथ स्वामी मंदिर)

यह भव्य मंदिर भी सेठ पूरन मल गनेरीवाल के परिवार द्वारा ही निर्मित कराया गया था, जिसकी मुख्य विशेषता इसका सात मंजिला विशाल दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का सफ़ेद 'गोपुरम' है जो पारंपरिक राजपूत छतरियों के साथ मिलकर एक अनूठा संलयन पेश करता है। भगवान बैकुंठ वेंकटेश (विष्णु) को समर्पित इस भव्य परिसर के भीतर सोने की परत चढ़े गर्भगृह और छतों पर की गई बारीक काँच की कारीगरी (शीश महल) दर्शनीय है।

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अनछुआ छिपा रत्नAncient Kanbai Temple deep in Pushkar Forest
अति प्राचीन — घने जंगल के बीच स्थित गुप्त धाम

कनबाई मंदिर (क्षीर सागर विष्णु मंदिर)

पुष्कर नगर से लगभग 8 किमी दूर घने अरावली जंगलों (पुष्करारण्य) और नंद गाँव के पास स्थित एक बेहद रहस्यमयी और अनछुआ आध्यात्मिक स्थल। यहाँ काले कसौटी पत्थर से निर्मित भगवान विष्णु की 'क्षीर सागर' में शेषनाग पर शयन मुद्रा वाली एक अत्यंत प्राचीन प्रतिमा विराजमान है, जिसे स्थानीय मान्यताओं के अनुसार हज़ारों वर्ष प्राचीन माना जाता है। परिसर के भीतर पत्थरों को काटकर बनाए गए पांच ऐतिहासिक सीढ़ीदार कुंड (जलाशय) स्थित हैं जिनका संबंध सीधे सतयुग के ब्रह्मा जी के महायज्ञ से जुड़ा है।

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ट्रेकNaga Pahar Snake Mountain ridgePhoto by Vivek
अरावली पर्वतमाला — पावन ट्रेक

नाग पहाड़ (साँप पर्वत)

अजमेर और पुष्कर को विभाजित करने वाली एक पवित्र पहाड़ी श्रृंखला। अगस्त्य मुनि की कथाओं से समृद्ध, यह पवित्र नाग कुंड और लूनी नदी का उद्गम स्थल है।

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सिख तीर्थGurudwara Singh Sabha PushkarPhoto by AXP Photography
ऐतिहासिक — सरोवर मुखी

गुरुद्वारा सिंह सभा

गुरु नानक देव जी (1509) और गुरु गोबिंद सिंह जी (1706) की यात्राओं की स्मृति में बना सफेद संगमरमर का गुरुद्वारा। यहाँ गोबिंद घाट और ऐतिहासिक हुकमनामा सुरक्षित है।

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सुझाया गया पैदल मार्ग

आधे दिन का सुगम मंदिर दर्शन सर्किट

पुष्कर के इन सभी प्रधान मंदिरों को आप सुबह के महज़ 3 से 4 घंटे की एक बेहद सुखद पैदल वॉक में आसानी से कवर कर सकते हैं। बेहतरीन सुनहरी धूप और भीड़ से बचने के लिए अपनी यात्रा सुबह 6:00 AM पर शुरू करें।

1
सावित्री शिखर (सुबह 6:00 AM)

अरावली मरुस्थलीय घाटी पर सूर्योदय का विहंगम दृश्य देखने के लिए भोर में ही रत्नागिरी पहाड़ी की सीढ़ियों से चढ़ाई शुरू करें (चूंकि रोपवे सुबह 7:30 बजे से शुरू होता है)।

2
ब्रह्मा मंदिर (सुबह 7:30 AM)

पहाड़ी से नीचे उतरकर भगवान ब्रह्मा के दर्शनों के लिए जाएँ। सुबह के समय यहाँ कतारें छोटी होती हैं और परिसर में असीम शांति होती है।

3
ब्रह्मा घाट और सरोवर (सुबह 8:30 AM)

सरोवर के मुख्य घाट पर सरोवर को प्रणाम करें और धूप चढ़ने से पहले पानी पर सुबह की प्रार्थना और अनुष्ठानों के सुंदर दृश्यों को देखें।

4
पुराना रंगजी मंदिर (सुबह 9:30 AM)

मुख्य बाज़ार से गुज़रते हुए पुराना रंगजी मंदिर के गगनचुंबी गोपुरम प्रवेश द्वार तक पहुँचें। यात्रा समाप्त कर हलवाई गली में रसीले मालपुए का नाश्ता करें।