विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थलीय मेला
हर साल नवंबर में, पुष्कर नगर के उत्तरी छोर पर फैला शांत मरुस्थलीय मैदान दुनिया के सबसे अनूठे सांस्कृतिक उत्सव के रंग में रंग जाता है। पुष्कर ऊँट मेले (आधिकारिक नाम कार्तिक मेला) की शुरुआत थार मरुस्थल के ग्रामीण पशुपालकों के बीच ऊँटों और घोड़ों के व्यापार के एक व्यावसायिक माध्यम के रूप में हुई थी, जो सदियों के सफर के साथ एक भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया। इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा के पवित्र महास्नान के साथ होता है।
आज यह मेला अपने 10 दिनों के आयोजन में भारत और विदेशों से 2 लाख से अधिक सैलानियों को आकर्षित करता है, जिससे यह राजस्थान का सबसे पसंदीदा और वैश्विक स्तर पर चर्चित आयोजन बन चुका है।
मेले का दैनिक कार्यक्रम — 10 दिन
कृपया ध्यान दें: नीचे दिया गया दैनिक कार्यक्रम संभावित है। जैसे ही राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा आधिकारिक तौर पर अंतिम रूपरेखा जारी की जाएगी, हम यहाँ सटीक और विस्तृत दिन-प्रतिदिन का कार्यक्रम अपडेट करेंगे।
रेतीले धौरों पर हजारों ऊँटों और घोड़ों के डेरे लग जाते हैं। पशुपालकों के तंबुओं के बीच सौदेबाजी देखने और लोक जीवन को करीब से देखने के लिए सुबह जल्दी पहुँचें।
पशुओं की खरीद-बिक्री धीरे-धीरे धीमी हो जाती है और पशुपालक लौटने लगते हैं। अब मुख्य ध्यान मेला स्टेडियम के कार्यक्रमों (ऊँट श्रृंगार, रस्साकशी, और पारंपरिक लोक नृत्य) पर केंद्रित हो जाता है।
मरुस्थलीय टीलों पर बहुत ही कम ऊँट बचते हैं। सारा आकर्षण सरोवर के घाटों की तरफ चला जाता है जहाँ कार्तिक पूर्णिमा का पावन स्नान, सीढ़ियों पर दीप प्रज्वलन और संध्या महाआरती होती है।
मुख्य आकर्षण और गतिविधियाँ
- पशु मेला मैदान (व्यापारिक क्षेत्र): मेले का मुख्य मैदान — सुबह 7:00 बजे यहाँ पहुँचें ताकि भोर की पहली सुनहरी धूप में पशुपालकों को ऊँटों का सौदा करते हुए कैमरे में कैद कर सकें।
- लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ: सांस्कृतिक मंच पर होने वाले निःशुल्क राजस्थानी कार्यक्रम, जिनमें 'कालबेलिया नृत्य' और 'सपेरा नृत्य' मुख्य आकर्षण होते हैं।
- हॉट एयर बैलून सफारी: मेला सप्ताह के दौरान उपलब्ध — इसकी बुकिंग 2-3 दिन पहले ही कर लें। आसमान से उड़ते हुए पूरे मेले और पुष्कर शहर का विहंगम नजारा मिलता है।
- ऊँट व जीप सफारी: मेले के छोर से धौरों के बीच ले जाने वाली सफारी — सवारी से पहले ही दाम तय कर लें।
- फ़ोटोग्राफ़ी वॉक: कई पेशेवर टूर ऑपरेटर और फ़ोटोग्राफ़र इस दौरान 'गोल्डन ऑवर' (सुबह/शाम) में गाइडेड फ़ोटोग्राफ़ी वॉक का आयोजन करते हैं।
- कार्तिक पूर्णिमा स्नान: पुष्कर सरोवर के घाटों पर होने वाला आस्था का महास्नान — जीवन में एक बार अनुभव करने योग्य अनूठा दृश्य।
मेले के दौरान कहाँ ठहरें?
मेला मैदान के पास ही आलीशान स्विस टेंट लगाए जाते हैं जिनमें गर्म पानी, आरामदायक बिस्तर, बिजली और खान-पान की बेहतरीन व्यवस्था होती है। इसकी बुकिंग 3-4 महीने पहले कर लें।
पुष्कर के हेरिटेज हवेली होटल जहाँ की छतों (रूफटॉप) से मेला मैदान और घाटों का सुंदर नज़ारा दिखता है। नगर के उत्तरी छोर के होटल सबसे बेहतर हैं। बुकिंग अगस्त-सितंबर में कर लें।
आवास के सामान्य विकल्पों (हेरिटेज हवेलियाँ, सरोवर के नज़ारे वाले होटल, गेस्टहाउस और डेज़र्ट कैंप) की जानकारी के लिए हमारी पूरी आवास मार्गदर्शिका देखें →
फ़ोटोग्राफ़ी गाइड
पुष्कर का ऊँट मेला देश-विदेश के फ़ोटोग्राफ़रों के लिए एक स्वर्ग के समान है। स्थानीय मर्यादा का ध्यान रखते हुए बेहतरीन तस्वीरें खींचने के लिए इन बातों की गाँठ बाँध लें:
- धौरों पर स्वर्णिम घंटा (गोल्डन ऑवर): पशुपालकों और ऊँटों की सबसे बेहतरीन तस्वीरें सुबह जल्दी (6:30 AM से 8:00 AM) या देर शाम (4:30 PM से 6:00 PM) के समय आती हैं, जब हवा में उड़ती रेतीली धूल सूर्य की किरणों के साथ एक जादुई कोहरा बनाती है।
- पोर्ट्रेट्स (चेहरे के चित्र): स्थानीय ग्रामीणों, साधुओं या चरवाहों की नज़दीकी तस्वीर लेने से पहले हमेशा मुस्कुराकर उनकी अनुमति लें। कुछ लोग पोज़ देने के बदले छोटा सा उपहार या बख्शीश माँग सकते हैं, जो यहाँ आम बात है।
- स्नान घाट: पवित्र स्नान घाटों पर लोगों के स्नान करते समय फ़ोटोग्राफ़ी पूरी तरह गैर-कानूनी और सख्त वर्जित है। घाटों के किनारे टहलते समय अपना कैमरा बैग के अंदर ही रखें।
- कैमरा गियर और सुरक्षा: चरवाहों के सहज दृश्यों (कैंडिड शॉट्स) को बिना किसी बाधा के दूर से कैद करने के लिए टेलीफ़ोटो लेंस (70-200mm) सबसे उपयोगी है। कैमरे को बारीक मरुस्थलीय रेत से बचाने के लिए ब्लोअर और प्रोटेक्टिव कवर साथ रखें।
घाटों से जुड़े विशेष फ़ोटोग्राफ़ी नियमों के लिए हमारी घाट फ़ोटोग्राफ़ी गाइड देखें →
मेले में ज़िम्मेदार पर्यटन
यह ऊँट मेला स्थानीय लोगों के लिए केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं बल्कि गहरे धार्मिक महत्त्व का उत्सव है। कृपया ध्यान रखें:
- किसी भी व्यक्ति की तस्वीर लेने से पहले अनुमति लें — विशेष रूप से पूजा-पाठ या अनुष्ठान के दौरान।
- उन ऊँटों की सवारी करने से बचें जो अस्वस्थ, थके हुए या कुपोषित दिखाई दें।
- स्थानीय शिल्पकारों और दुकानदारों से शालीनता से मोलभाव करें, अत्यधिक आक्रामक बहस करना अशोभनीय है।
- सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से पूरी तरह बचें। अपनी पानी की बोतल साथ रखें, क्योंकि मेले में भारी मात्रा में कचरा जमा हो जाता है।
- स्थानीय ग्रामीण कलाकारों और शिल्पकारों से सीधे सामान खरीदें, क्योंकि मेले की यह कमाई ही उनके साल भर की आजीविका का मुख्य आधार होती है।






