
घाटों की गूँज और मरुस्थल की खामोशी—यही है खूबसूरत पुष्कर
पवित्र घाटों और प्राचीन मंदिरों का एक कालातीत अभयारण्य — जहाँ आस्था रेत से मिलती है
पवित्र कमल की पंखुड़ी से जन्मा एक शहर
"पुष्कर वह स्थान है जहाँ शाश्वत अरावली पहाड़ियों के बीच प्राचीन पौराणिक कथाएँ और जीवंत आधुनिक ट्रैवलर संस्कृति एक साथ सांस लेती हैं।"
वैदिक कथाओं के अनुसार, सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा के हाथों से एक नीलकमल पृथ्वी पर गिर गया था, जिससे पवित्र जलधाराएँ फूट पड़ीं और पावन पुष्कर सरोवर का निर्माण हुआ। आज, यह शांत मरुस्थलीय घाटी पूरे भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है।
चाहे आप शाम के मंत्रोच्चार के बीच घाटों की सीढ़ियों पर टहल रहे हों, भोर की पहली किरण में रत्नागिरी पहाड़ी की चढ़ाई कर रहे हों, या गुलाबों और अगरबत्ती की महक से महकते हलचल भरे बाज़ारों में घूम रहे हों — पुष्कर एक ऐसा अनूठा अनुभव देता है जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलता।
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एक स्थानीय निवासी की तरह पुष्कर की संस्कृति, यात्रा व्यवस्थाओं और पवित्र स्थलों को करीब से जानने के लिए हमारे खास अध्यायों को चुनें।

पवित्र सरोवर के घाट
पवित्र सरोवर के चारों ओर बने प्रत्येक घाट के इतिहास, परंपराओं, क्षेत्रों (ज़ोन) और फ़ोटोग्राफ़ी के नियमों को समझाने वाली एक गाइड।
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पूजा और अनुष्ठान
समस्त पवित्र धार्मिक अनुष्ठानों की विस्तृत जानकारी — दैनिक आरती और पवित्र स्नान से लेकर पितृ दोष निवारण, कुंभ विवाह, त्रिपिंडी श्राद्ध और सर्प दोष पूजा तक।
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ब्रह्मा मंदिर
14वीं शताब्दी के दुर्लभ जगतपिता ब्रह्मा मंदिर की विस्तृत जानकारी — इसकी पौराणिक उत्पत्ति, दर्शन के नियम और अनुष्ठान परंपराएँ।
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सावित्री पहाड़ी मंदिर
सूर्योदय या सूर्यास्त के विहंगम दृश्यों के लिए रत्नागिरी पहाड़ी पर कैसे चढ़ें। मनोरम रोपवे और 1,000 सीढ़ियों वाले पारंपरिक तीर्थ मार्ग की तुलना करें।
रत्नागिरी पहाड़ी पर चढ़ें →
संपूर्ण ऊँट मेला मार्गदर्शिका
विश्व के सबसे बड़े ऊँट मेले की संपूर्ण गाइड। पशु व्यापार का समय, देखने के सर्वश्रेष्ठ स्थान, आलीशान डेज़र्ट कैंप और स्थानीय संस्कृति का सम्मान करते हुए तस्वीरें खींचने के टिप्स जानें।
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भोजन एवं कैफे संस्कृति
हलवाई गली के गर्मागर्म मालपुए, यहाँ की मशहूर दाल कचौरी, ताज़ा मलाईदार लस्सी और दुनिया भर के पर्यटकों के पसंदीदा इंटरनेशनल शाकाहारी कैफ़े की पूरी जानकारी।
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यात्रा की बुनियादी बातें और सुझाव
शाकाहारी भोजन के नियमों, पूर्ण शराब बंदी, अजमेर जंक्शन के रास्ते आने-जाने के विकल्पों और यात्रा के लिए सबसे बेहतरीन मौसम से जुड़े महत्वपूर्ण दिशानिर्देश।
योजना के टिप्स पढ़ें →अपने दिन कैसे बिताएँ
चाहे आपके पास 2 दिन हों या पूरा एक सप्ताह, पुष्कर हर तरह के यात्री को एक अनूठा अनुभव देता है।
सरोवर और घाट के नज़ारे वाले किसी गेस्टहाउस में रुकें। ब्रह्मा घाट पर होने वाली दिव्य संध्या महाआरती (दीप दान) का हिस्सा बनें — जिसे देखना बिल्कुल न भूलें।
भोर की पहली किरण में ब्रह्मा मंदिर के दर्शन करें। गुलाब की पंखुड़ियों से महकते बाज़ार में घूमें और हलवाई गली में रसीले मालपुए का स्वाद लें।
पूरे शहर और सरोवर के विहंगम सूर्योदय को देखने के लिए 1,000 सीढ़ियाँ चढ़ें या रोपवे के ज़रिए सावित्री माता मंदिर पहुँचें।
शाम ढलते ही अरावली के रेतीले धौरों की सवारी पर निकलें। मरुस्थल के साफ आसमान तले तारों की छाँव और पारंपरिक राजस्थानी लोक संगीत का आनंद लें।
यात्रा की आवश्यक बातें
पुष्कर एक अत्यंत पवित्र नगरी है — यहाँ मांस, मछली, और अंडे पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं। शहर में शराब बंदी भी लागू है। स्थानीय रीति-रिवाजों और पवित्रता का पूरा सम्मान करें। स्थानीय नियम देखें →
सरोवर के कई घाटों पर फ़ोटोग्राफ़ी प्रतिबंधित है — विशेष रूप से धार्मिक पूजा और स्नान के समय। श्रद्धालुओं की तस्वीर लेने से पहले हमेशा उनकी अनुमति लें। फ़ोटोग्राफ़ी की पूरी गाइड →
निकटतम रेलवे स्टेशन अजमेर जंक्शन के लिए ट्रेन लें, और फिर वहाँ से 12 किमी दूर पुष्कर के लिए टैक्सी या बस सेवा लें। जयपुर से सीधी बसें भी उपलब्ध हैं। यातायात की पूरी गाइड →
सर्दियों के महीनों (अक्टूबर से मार्च) में यहाँ मौसम बेहद सुहावना और ठंडा (15–28°C) रहता है। अप्रैल से जून के महीनों में आने से बचें, क्योंकि यहाँ मरुस्थलीय गर्मी 45°C के पार जा सकती है। मौसम गाइड →
मंदिरों और घाटों के दर्शन करते समय अपने कंधे और घुटने पूरी तरह ढककर रखें (शालीन वस्त्र पहनें)। किसी भी पवित्र परिसर या घाट की सीढ़ियों पर जाने से पहले जूते-चप्पल उतार दें। ड्रेस कोड की पूरी जानकारी →
पुष्कर बजट यात्रा के लिए बेहद अनुकूल है। यहाँ स्थानीय राजस्थानी थाली की कीमत ₹80–150 तक होती है और गेस्टहाउस में कमरे ₹500/रात से शुरू हो जाते हैं। स्थानीय बाज़ार में शालीनता से मोलभाव ज़रूर करें!
"पुष्कर दुनिया की इकलौती ऐसी जगह है जहाँ सूर्योदय के समय आप खुद को समय की सीमाओं से परे महसूस करते हैं — मंत्रोच्चार, गेंदे के फूल और पवित्र जल मिलकर जैसे वक्त को थाम देते हैं।"


