The beautiful white marble Gurudwara building next to the water in PushkarPhoto by AXP Photography
आध्यात्मिक विरासत

गुरुद्वारा सिंह सभा

सफेद संगमरमर से निर्मित पुष्कर का एक ऐतिहासिक सिख तीर्थस्थल, जो 1509 में गुरु नानक देव जी और 1706 में गुरु गोबिंद सिंह जी के आगमन की स्मृति को संजोए हुए है।

19वीं सदीस्थापना
पूर्वी घाटस्थान
गुरु नानक और गोबिंद सिंह जीसमर्पित
निःशुल्कप्रवेश

गुरु नानक देव जी की ऐतिहासिक यात्रा (1509)

मानवता और समानता का संदेश

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने 1509 ईस्वी में अपनी दूसरी उदासी (धार्मिक यात्रा) के दौरान पवित्र नगरी पुष्कर का दौरा किया था। वे कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहाँ पहुँचे और पुष्कर सरोवर के तट पर विभिन्न संतों और विद्वानों से चर्चा की। उन्होंने यहाँ एकेश्वरवाद और मानव सेवा का उपदेश दिया।

सिख तीर्थयात्रियों का जुड़ाव

गुरु नानक देव जी के आगमन के कारण ही पुष्कर सिखों के लिए एक पवित्र स्थल बन गया। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहाँ गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व (गुरुपर्व) को बहुत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

गुरु गोबिंद सिंह जी का पुष्कर आगमन (1706)

राजपूताना राज्यों की यात्रा

सन् 1706 में मुकत्सर की लड़ाई के बाद दक्षिण की ओर बढ़ते हुए, सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने पुष्कर की यात्रा की थी। वे यहाँ लगभग एक सप्ताह रहे और सरोवर के तट पर एक आम के बगीचे में विश्राम किया।

पुजारी चेतन दास और हुकमनामा

गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रवास के दौरान स्थानीय पुजारी चेतन दास ने श्रद्धापूर्वक उनकी सेवा की। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर गुरु जी ने उन्हें भोजपत्र पर लिखित एक हुकमनामा (आदेशपत्र) और एक कंघा भेंट किया, जो आज भी उनके वंशजों द्वारा सुरक्षित रखा गया है।

गोबिंद घाट

ऐतिहासिक घाट

सरोवर के जिस घाट पर गुरु गोबिंद सिंह जी ने स्नान किया था, उसे सिखों द्वारा 'गोबिंद घाट' का नाम दिया गया। यहाँ चार लिपियों (गुरुमुखी, देवनागरी, फारसी और रोमन) में लिखा हुआ शिलालेख आज भी मौजूद है और गुरु गोबिंद सिंह जी की स्मृति आज भी यहाँ जीवित है।

सफेद संगमरमर की भव्य वास्तुकला

संगमरमर का महल

19वीं सदी में बने एक छोटे गुरुद्वारे के स्थान पर अब एक भव्य सफेद संगमरमर की इमारत का निर्माण बाबा लाखा सिंह के नेतृत्व में किया गया है। यह इमारत अपने आकर्षक गुंबदों, छतरियों और स्वर्ण कलशों के साथ अरावली की पृष्ठभूमि में अद्भुत लगती है।

दरबार साहिब

गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर मुख्य दरबार साहिब है जहाँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश होता है। दरबार साहिब की बड़ी खिड़कियों से पवित्र सरोवर और सामने रत्नागिरी पर्वत पर स्थित सावित्री मंदिर का भव्य नज़ारा दिखता है।

यात्री सूचना और व्यवस्था

  • स्थान: गुरुद्वारा सिंह सभा पुष्कर के पूर्वी भाग में स्थित है। यह ब्रह्मा मंदिर और मुख्य बाजार से लगभग 10 मिनट की पैदल दूरी पर है।
  • समय: गुरुद्वारा साहिब 24 घंटे खुला रहता है। सुबह 4:30 बजे से नितनेम पाठ शुरू हो जाता है और शाम को संध्या आरती और कीर्तन होता है।
  • मर्यादा: सिर ढंकना और जूते उतारना अनिवार्य है। मुख्य दरबार साहिब के अंदर मोबाइल या कैमरा का उपयोग करना वर्जित है।